नवजात का मल किस रंग का होना चाहिए?HealthPlanet

Posted on Wed 19th Oct 2022 : 09:32

शिशु का मल: क्या सामान्य है, क्या नहीं
हो सकता है यह बहुत हैरत की बात है लगे, मगर वास्तव में माता-पिता अपना काफी समय शिशु का मल देखने में बिताते हैं! शिशु का मल कुछ अलग रंग का हो, पतला या ठोस हो या फिर शिशु बहुत ज्यादा या कम बार मल त्याग कर रहा हो, तो माता-पिता को चिंता होना स्वाभाविक है।

सबसे पहली बात तो यह है कि आपके शिशु के लिए क्या सामान्य है, वह नीचे दी गई बातों पर निर्भर करेगा, जैसे कि:

शिशु की उम्र क्या है
शिशु स्तनपान करता है या बोतल से दूध पीता है
शिशु ने ठोस आहार लेना शुरु कर दिया है या नहीं

जन्म से लेकर शिशु के पहले साल तक उसके मल में काफी बदलाव आता है। यह भी संभव है कि उसका मल आज कुछ और तरह का हो, और अगले दिन ही उसमें बदलाव आ जाए! आप जल्द ही यह पहचान जाएंगी कि आपके शिशु का मल आमतौर पर कैसा रहता है।

यदि आपके शिशु के मलत्याग का तरीका एक समान रहता है, शिशु हमेशा की तरह सक्रिय रहता है और उसका वजन भी निरंतर बढ़ रहा है तो चिंता की बात नहीं है। मगर यदि आपको अचानक से बदलाव नजर आए या ऐसे संकेत नजर आएं कि शिशु असहज है या खुश नहीं है, तो डॉक्टर से बात करें।
मेरे नवजात शिशु का मल कैसा होगा?
जन्म के बाद शुरुआती एक-दो दिन तक आपका शिशु मल के रूप में मिकोनियम बाहर निकालेगा। मिकोनियम हरे-काले रंग का चिपचिपा और टार जैसी प्रकृति का होता है। यह श्लेम (म्यूकस), एमनियोटिक द्रव्य और जो कुछ शिशु गर्भ के अंदर रहकर निगलता है, उस सबसे बना होता है।

शिशु के छोटे-छोटे नितंबों से मिकोनियम को पौंछना मुश्किल हो सकता है, मगर इसकी उपस्थिति इस बात का संकेत है कि शिशु की आंते सामान्य ढंग से कार्य कर रही हैं।
अगर मैं स्तनपान करवा रही हूं, तो शिशु का मल कैसा होगा?
आपका पहला दूध यानि कोलोस्ट्रम एक रेचक (लैक्सेटिव) के तौर पर कार्य करता है और मिकोनियम को शिशु के शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। जब आपके स्तनों में अच्छी तरह दूध आने लगता है, करीब तीन दिनों के बाद, तो आपके शिशु के मल में धीरे-धीरे बदलाव आएगा। अब वह ऐसा होगा:

कम से कम एक सिक्के के माप का।
रंग थोड़ा हल्का होगा, जो कि हरे-भूरे से बदलकर अब सरसों के रंग जैसा पीला और चटकीला हो गया होगा। इस पीले मल से हल्की सी मीठी गंध भी आ सकती है।
बनावट में थोड़ा पतला। शिशु का मल कभी दानेदार और कभी फटे हुए दूध की तरह दिख सकता है।

शुरुआती हफ्तों में, आपका शिशु हर बार स्तनपान के दौरान या इसके बाद मल त्याग कर सकता है। पहले सप्ताह में वह एक दिन में औसतन करीब चार बार मलत्याग करेगा। जल्द ही शिशु की मल प्रक्रिया एक दिनचर्या में व्यवस्थित हो जाएगी। इसके बाद आप पाएंगी कि शिशु हर दिन एक समान समय पर मल त्याग कर रहा है।

​शुरुआती कुछ हफ्तों के बाद स्तनपान करने वाले कुछ शिशु एक हफ्ते में एक बार ही मल त्याग करते हैं। यदि शिशु का मल नरम है और आसानी से बाहर निकल रहा है ता इसमें कोई परेशानी की बात नहीं है। आपके शिशु के मल त्याग की दिनचर्या में निम्न कारणों से परिवर्तन आ सकता है:

जब आप शिशु को ठोस आहार देना शुरु करती हैं
जब उसकी तबियत ठीक न हो
जब वह कम बार दूध पी रहा हो

क्या फॉर्मूला दूध से शिशु के मल पर असर पड़ता है?
अगर, आप अपने शिशु को फॉर्मूला दूध पिला रही हैं, तो उसका मल स्तनपान करने वाले शिशु से अलग हो सकता है। आप पाएंगी कि उसका मल:

स्तनपान करने वाले शिशु की तुलना में बनावट में थोड़ा ठोस (टूथपेस्ट की बनावट जैसा)। ऐसा इसलिए क्योंकि स्तनदूध की तरह फॉर्मूला दूध पूरी तरह पचाया नहीं जा सकता।
फीकी पीली रंगत या पीला-भूरा रंग
तीक्ष्ण दुर्गंध, जैसे कि वयस्कों के मल से आती है


स्तनपान करने वाले शिशुओं की तुलना में बोतल से दूध पीने वाले शिशुओं को कब्ज होने की संभावना ज्यादा होती है। अगर आपको लगे कि शिशु को कोई तकलीफ है, तो अपने डॉक्टर से बात करें।
क्या शिशु के मल में बदलाव होगा अगर वह स्तनपान छोड़कर फॉर्मूला दूध पीए?

हां, इसमें बदलाव आएगा। आप शायद पाएं कि शिशु का मल अब गहरे रंग का और पेस्ट जैसा हो गया है। इनमें से ज्यादा दुर्गंध भी आ सकती है।

अगर आप शिशु को स्तनदूध से अब फॉर्मूला दूध देना चाह रही हैं, तो इसकी शुरुआत धीरे-धीरे करें, आदर्शत: कई हफ्तों का समय लेकर।

इससे आपके शिशु के पाचन तंत्र को फॉर्मूला दूध के अनुरूप ढलने का समय मिल सकेगा और कब्ज से बचने में भी मदद मिलेगी। साथ ही, इससे आपको भी दर्दभरे, सूजे स्तनों और मैस्टाइटिस होने का खतरा कम रहेगा।

जब शिशु को बोतल से दूध पीने की आदत हो जाती है, तो उसके मल त्याग की दिनचर्या पूरी तरह बदल सकती है!
ठोस आहार लेने के बाद शिशु का मल कैसा होगा?
शिशु जब ठोस आहार खाना शुरु करता है, तो इसका उसके मल पर काफी प्रभाव पड़ता है। आप पाएंगी कि शिशु जो भोजन खाता है, उसका मल भी उसी तरह का होता है। अगर आप उसे गाजर की प्यूरी खिलाएंगी, तो उसका मल चटक नारंगी रंग का होगा।

आप पाएंगी कि फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे कि राजमा, मटर, किशमिश शिशु के मल से साबुत ही बाहर निकल जाती हैं। शिशु इनको पचा नहीं पाया है। जैसे-जैसे शिशु बड़ा होगा इसमें बदलाव आएगा और वह अधिक प्रभावी ढंग से फाइबर को पचा पाएगा।

शिशु धीरे-धीरे जब विस्तृत वैरायटी के भोजन खाने लगता है, तो उसका मल भी गाढ़ा, गहरे रंग का व और ज्यादा बदबूदार हो जाएगा। निम्नांकित

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author -> Poster Name

Short info